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Thursday, December 19, 2013

मृत्यु के बाद ?

     
                     
     







मौत के बाद क्या होता है? यह सवाल सदा से जिज्ञासा का विषय रहा है,लेकिन आज तक इस सवाल का साफ़ एवं सटीक उत्तर नहीं मिल सका है.पूर्ण मृत्यु के बाद क्या होता है,इसकी विस्तृत जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है.लेकिन कुछ देर मृत रहकर,फिर चेतना प्राप्त करनेवाले लोगों ने इस रहस्य भरे प्रश्न के उत्तर अपने-अपने ढंग से दिये हैं.

फ़्रांस के डॉ. डेलाकौर ने इसी प्रश्न को अपने अनुसंधान का विषय बनाया.उन्होंने मौत के पहले पड़ाव से लौटने वाले रोगियों एवं दुर्घटनाग्रस्त व्यक्तियों की मनःस्थिति और उनकी मौत के पहले चरण की अनुभूतियों का गहरा अध्ययन,मनन और विश्लेषण किया,जिसे उन्होंने अपनी एक पुस्तक के रूप में प्रस्तुत किया है.डेलाकौर ने जिन व्यक्तियों को अपने अनुसंधान का विषय बनाया,वे कोई अंधविश्वासी नहीं थे,बल्कि विभिन्न वर्गों से संबंधित स्वस्थ मस्तिष्क के लोग थे.

हालाँकि डेलाकौर के मरीजों में एक थे फ़्रांस के अंतर्राष्ट्रीय प्रसिद्ध अभिनेता डेनिमल जीनल.कई वर्ष पूर्व उन्हें दिल का दौरा पड़ा था.उन्हें अस्पताल ले जाने में अधिक समय लग गया था.ऑपरेशन थियेटर में ले जा कर जब उनके दिल की धड़कनें रिकॉर्ड करने वाली मशीनें लगायी गई,तो मशीन की सूई अपनी जगह पर स्थिर रही,यानि उनकी हृदयगति रूक चुकी थी.

इसके बाद क्या हुआ,इसका वर्णन खुद डेनिमल के शब्दों में ‘मुझे ऐसा लगा कि मैंने कमरे में तैरना शुरू कर दिया है.एक डॉक्टर मुझ पर झुका,मुझे जांचा-परखा और मृत पाकर गहरी सांस ली और पीठ मोड़कर चला गया.इसके बाद एक सहायक डॉक्टर ने मुझे पूरी तरह चादर से ढँक दिया.मैं उस समय बरबस चिल्ला रहा था पर मेरी आवाज किसी तक पहुँच ही नहीं रही थी.कुछ देर मैं बहुत भयभीत रहा,लेकिन उसके बाद मैंने भय का अनुभव करना बंद कर दिया.इसके बाद मैंने देखा कि मेरे माँ-बाप वहां आए.उन्हें देखकर मैं बहुत खुश हुआ.इसके बाद मेरी माँ मुझे ऐसे बाग़ में ले गयी,जो रंगारंग फूलों से भरा महक रहा था.यहाँ उस समय चारों ओर बच्चे ही बच्चे थे.वे सब खेल-कूद रहे थे.तभी मेरी माँ ने मुझसे कहा,’देखो,तुम्हारा बेटा वहां खेल रहा है और वह किस कदर मजे में है.सचमुच मैंने उसे वहां दूसरे बच्चों के साथ खेलते देखा.’

डेनिमल के इस दिल के दौरे के कुछ वर्ष पहले ही उसके माता-पिता की मृत्यु हो चुकी थी और इसके कुछ ही समय पहले उसका नन्हा सा बेटा भी मर चुका था.डेनिमल ने मृत्यु के बाद के अपने इस अनुभव के अंत में कहा,’मेरी माँ फिर मेरे पास आयी और मुझे थपथपाकर कहने लगी कि ‘डेनिमल,अब तुम लौट जाओ,जिंदगी तुम्हारा इंतजार कर रही है.’इसके बाद ही मैं यहाँ वापस लौट आया.’

बिल्कुल ठीक इसी समय ऑपरेशन थियेटर में डॉक्टरों ने देखा कि डेनिमल के दिल की धड़कन रिकॉर्ड करने वाली मशीन की सूई एकाएक हरकत में आ गई है और उसके चेहरे पर भयानक पीड़ा एवं चेतना के चिन्ह लक्षित होने लगे हैं.सहसा उसने अपनी आँखें खोल लीं और उसे महसूस होने लगा कि वह अभी जीवित है.इस प्रकार दिल का दौरा पड़ने के बाद से दुबारा आँख खोलने के बीच में उसने जो सफ़र तय किया,उस दौरान वह अपने मर चुके माता-पिता एवं नन्हें बच्चे से मिल आया.

अमेरिका के मशहूर डॉक्टर वेन राबर्ट्स ने भी इसी विषय पर काफी जानकारी इकठ्ठी की है.उन्होंने कहा है कि मर रहे व्यक्तियों के करीब खड़े होने पर कई बार ऐसा लगता है कि मृत-प्राय व्यक्ति अंतिम साँस लेने से पहले अपने किसी मृत रिश्तेदार या बेहद करीबी से बात कर रहा है या किसी अनजाने प्राकृतिक दृश्य का वर्णन,लेकिन यह सब उसके बड़बड़ाने या फुसफुसाने के स्वर में ही होता है.

डॉ. राबर्ट्स ने ग्रीस के किंग पाल से संबंधित एक विवरण दिया है.किंग पाल एक बीमारी के दौरान काफी अचेत रहा.जब उसे होश आया तो आँखें खोलने के बाद उसने अपनी पत्नी को बताया कि,’मैं अभी-अभी ऐसा महसूस कर रहा था कि मैं दूर किसी किनारे पर खड़ा हूँ.मेरे आगे काफी बड़ी काली सड़क है,जिसके अंत में एक प्रकाश पुंज है.’

एक दस वर्षीय बच्चे हैंस का अनुभव भी इसी सिलसिले में उल्लेखनीय है.वह एक दीवार के नीचे आकर बुरी तरह घायल हो गया था.डॉक्टर उसे चेतना-शून्य एवं मृत मान चुके थे.कुछ समय बाद उसकी चेतना फिर अपने आप लौट आई.होश में आने पर उसने बताया कि ‘मैं किसी दूसरी दुनियां में गया हुआ था.मैं वहां बहुत ख़ुशी महसूस कर रहा था.मैं वहां खेल रहे बच्चों के साथ खेला.मैं और भी खेलना चाहता था,लेकिन उन्होंने मुझे बताया कि ‘तुम्हारे पास इतना समय नहीं है कि तुम हमारे साथ और खेल सको.’उन्होंने यह भी कहा कि तुम्हें वापस जाना होगा और मैं वापस आ गया.’

मौत के बाद का यह छोटा सा सफ़र हमेशा खुशगवार और शांतिदायक ही होता है,यह जरूरी नहीं.कुछ व्यक्तियों को यह सफ़र अत्यधिक भयानक भी लगा है.जैसे,कुछ डरावने साए उन्हें दबोचने के लिए आगे बढ़ रहे हैं और उन्हें उन सायों की पकड़ से निकलने के लिए गहरा संघर्ष करना पड़ा है.

फ़्रांस की प्रसिद्ध नर्तकी बैनी चैरत का अनुभव तो और भी विचित्र है.वह टी.वी. पर अपना नृत्य पेश कर रही थी कि स्टूडियो में अचानक आग लग गई.वह बुरी तरह झुलस गई.अचेतावस्था में उसे अस्पताल पहुँचाया गया.कुछ मिनटों बाद उसके दिल की धड़कनें बंद हो गईं और कुछ देर बाद अपने आप फिर शुरू भी हो गईं.होश में आने पर चैरत ने डॉक्टरों को बताया कि मुझे लगा कि मेरा विवाह किसी अजनबी से हो रहा है और उस अजनबी का नाम माइकेल पुकारा गया है.’इतना बताकर चैरत खामोश हो गई क्योंकि,वह विवाहित थी और तब तक उसका पति वहां आ गया था.

अजीब संयोग है कि यह घटना भविष्य में सच साबित हुई.ठीक चार वर्ष बाद चैरत की दूसरी शादी हुई और उसके नए पति का नाम माइकेल था तथा उसकी शक्ल-सूरत बिल्कुल उस व्यक्ति से मिलती थी,जिसे उसने आग में जलने के बाद अपनी मृत अवस्था में देखा था.