फ़िल्मी गीत,संगीत से इतर कुछ गीत,नज्म क्या दिल के करीब हैं
आपके? जाहिर है,हममें से बहुतों के होंगें.कई गीत,नज्म जो किसी फिल्म के हिस्सा
नहीं बने लेकिन हम सब के दिलों के बहुत करीब हैं और जेहन में बसते हैं.
जानी बाबू और युसूफ आजाद काफी बड़े कव्वाली गायक रहे
हैं.लेकिन जानी बाबू का एक नज्म जो बहुत चर्चित नहीं हो सका वह मेरे दिल के बहुत
करीब है....
खिलौनों की बारात गुड़ियों की शादी
तेरा शहजादा मेरी शहजादी
तुझे याद हो या न हो लेकिन
मुझे याद आते हैं बचपन के वो दिन
मुझे मोहित चौहान तबसे पसंद रहे हैं जबसे 90 के दशक में उनके बैंड सिल्क रूट का एलबम बूँदें निकला था.
इसका एक गीत तो मुझे आज
भी बहुत पसंद है.....
डूबा-डूबा रहता हूँ
आँखों में तेरी
दीवाना बन गया हूँ
चाहत में तेरी
उषा उथुप भी मेरी पसंदीदा गायिका रही हैं और कई बार उनका
लाईव शो भी देखा है.जब वे स्टेज पर रहती हैं पूरी तरह छाई रहती हैं और
दर्शकों,श्रोताओं से संवाद बनाने में माहिर हैं.एक गीत जो कुछ अन्य बांग्ला
गायिकाओं ने भी सुरों से नवाजा है लेकिन उषा उथुप की आवाज में खूब फबते हैं.....
आहा तुमि सुंदरी कोता.....
कोलकाता
उषा उथुप का 80 के दशक में एक एलबम आया था जिसके गीत
हालांकि ज्यादा चर्चित नहीं हुए लेकिन वे अपने स्टेज शो में अक्सर गाती रही
हैं.....
आज मेरे घर आयेंगे साजन
छम छम नाचूंगी मैं
छोड़ो जी छोड़ो मेरा आंचल
बाली उमर है अभी मेरी
शरमा जाउंगी हाय मैं घबरा जाउंगी
चंदन दास काफी लोकप्रिय गजल गायक रहे हैं और उनकी गजलें
मुझे भी बहुत पसंद हैं लेकिन 90 के दशक में दूरदर्शन पर प्रसारित धारावाहिक ‘फिर
वही तलाश’ में बशीर बद्र के लिखे और चंदन दास की सुरों से सजे गजल आज भी मुझे चंदन
दास के सबसे उम्दा गजल लगते हैं......
मेरे हमसफ़र मेरे साथ तुम
सभी मौसमों में रहा करो
फिर इसका टाइटिल गीत .......
कभी हादसों की डगर मिले
कभी मुश्किलों का सफ़र मिले
ये चिराग हैं मेरी राह के,
मुझे मंजिलों की तलाश है