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Wednesday, July 24, 2013

जब रात बहुत अंधेरी है















जब रात बहुत अंधेरी है

मैं अकेले में तुम्हारे बारे में सोचता हूँ

आसमान में कुछ तारे टिमटिमाते हैं

और मैं बहुत उदास हो जाता हूँ .



एक मीठा ख्याल मन में आता है

तुम और मैं बिलकुल अकेले

अपने हाथों में तुम्हारा हाथ थामे हुए

कहीं दूर निकल जाते हैं.



तुम एक बचकानी बात कह देती हो

एक दिन इन तारों में खो जाऊँगी

तारों भरी रात में चलते हुए

तुम्हारी वही बातें याद आती हैं.


सोचता हूँ तुम्हारी बातें सच तो नहीं

शायद इन्हीं तारों में खो गई हो

फिर वही स्वप्न क्यूँ दिखाई देता है

मेरा हाथ तुम्हारे हाथों से छूट जाता है.



जब रात बहुत अंधेरी है

मैं अकेले में तुम्हारे बारे में सोचता हूँ

आसमान में कुछ तारे टिमटिमाते हैं

और मैं बहुत उदास हो जाता हूँ .