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Friday, March 13, 2015

सीनोरिटा बड़े बड़े लोगों में...

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इधर हाल में मल्लिका मैम की फिल्म फिर से देखने को मिली.पिछले कई सालों से बॉलीवुड से गायब थीं.हॉलीवुड में काम के नाम पर अमेरिका में इधर-उधर घूमने के बाद दुबारा जब से फिल्मों में सक्रिय हुई तो  फिर से वही पुराना रोल. उस तरह के रोल करने वालों की अब एक नई पौध तैयार हो गई है इमरान हाशमी अब नई अभिनेत्रियों के साथ व्यस्त हो गए हैं.ले देकर अब ओमपुरी ही बचे हैं.

हिंदी फिल्मों का एक ट्रेंड बड़ा पुराना है.अभिनेता तो चिर जवां रहता है और 50-55 की उम्र होने पर भी फिल्मों में कॉलेज जाते हुए और रोमांस करते दिखता है जबकि अभिनेत्रियों को 30-35 पर पहुँचते ही चरित्र अभिनेत्रियों के रोल ऑफर होने लगते हैं.

कुछ साल पहले मल्लिका मैम(अरे! वही,अपनी मल्लिका सहरावत) ने बड़ा शिगूफ़ा छेड़ा था और किससिखाने का स्कूल खोलने वाली थी. बड़े जोर शोर से इसका प्रचार भी किया था.पता नहीं सीखने वाले नहीं मिले या इरादा बदल गया.भावी अभिनेता,अभिनेताओं को भी प्रशिक्षण मिल जाता तो अच्छा रहता ताकि फिल्मों में असहज महसूस नहीं करते.

वैसे ‘किस’ करने के मामले में भारतीय बड़े असहज महसूस करते हैं.इस तरह किस करते हैं,मानो सामने वाले को स्वाइन फ़्लू हो.इस संबंध में बराक ओबामा साहब से टिप्स लेना चाहिए था जो उस दिन हिंदी में कुछ बोलते बोलते रुक गए थे. शायद वे  कहना कहते थे सीनोरिटा बड़े बड़े लोगों में किस करने का अंदाज अलग होता है.ओबामा साहब भी किस के मामले में बड़े एक्सपर्ट हैं.इस तरह किस करते हैं मानो सामने वाले को सूंघ रहे हों कि कोई बीमारी-विमारी तो नहीं है.यकीं न हो टी.वी. देख लें.

मल्लिका जी का स्कूल चल जाता तो यह भी सीखने को मिलता कि किस-किस को किस करना है और कैसे करना है.चीन में किस के बहाने होठों के काट खाने की घटना हो चुकी है.सो इस विद्या का सोच समझ कर और देख- भाल कर प्रयोग किया जाना आवश्यक है.

कॉलेज के दिनों में तो हमने भी खूब फ्लाईंग किस के अभ्यास किये थे.हालत यह हो गई थी कि साँस लेने पर गले से सीटी की आवाज आती थी. पर होनी को कौन टाल सकता है.गलती से एक दिन फ्लाईंग किस अपनी सहपाठी की जगह मिस्ड कॉल की तरह साइकोलॉजी की मैडम घोष को जा लगी.उन्होंने बांग्ला मिश्रित हिन्दी में वो लंतरानियाँ भेजी कि वो दिन और आज का दिन, फिर कभी हथेली का धूल झाड़ने के लिए भी फूंक नहीं मारी.

वैसे इस ‘किस’ स्कूल से भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ होने वाला था.टूथपेस्ट बनाने वालों की बिक्री बढ़ जाती.दन्त चिकित्सकों की गाड़ी दौड़ने लगती.आखिर सुन्दर मोतियों से दांत का सवाल है.

अपना देश वैसे भी पान,गुटखा,किस्म-किस्म के पान मसालों, तम्बाकू,बीड़ी,सिगरेट आदि के लिए कुख्यात है. ‘किस स्कूल चालू हो जाता तो ये सब खुद ब खुद बंद हो जाते. स्वास्थ्य विभाग को गुटखा,पान-मसालों, सिगरेट के पैकेटों पर भूत प्रेत के चित्र लगाने से छुटकारा मिल जाता.किस स्कूल के फायदे ही फायदे हैं.

मल्लिका मैम तो वैसे भी आजकल फ्री हैं. हॉलीवुड-बॉलीवुड का चक्कर छोड़कर यदि फिर से इसी में ध्यान लगाएं तो कुछ ही दिनों में फ़ोर्ब्स की सूची में अपना नाम लिखवा सकती हैं.अपनी भी यही इच्छा है कि इस स्कूल से प्रशिक्षण ले लें तो क्या पता एक और भींगे होठ तेरेका सृजन हो जाये.

सो अब तो सोते जागते सिर्फ यही गुनगुनाने का का मन करता है कि…….

हम भी हैं,तुम भी हो
दोनों हैं आमने सामने
किस तरह किसदें
कि बदल जाएं प्यार के मायने.

Keywords खोजशब्द :- Art of Kiss,Kiss School,Humor

Thursday, March 5, 2015

मी कांता बाई देशमुख आहे

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अहले सुबह सोकर उठा ही था कि मोबाईल की घंटी बजनी शुरू हो गई.फोन उठाया ही था कि मेरी आवाज सुने बिना ही उधर से आवाज आने लगी,’मी कांता बाई आहे.....’.मराठी में करीब तीन-चार मिनट की शिकायत भरे लहजे से आभास हुआ कि कोई कांता बाई देशमुख बोल रही थी और कह रही थी कि वह आज काम पर नहीं आएगी.लगा मोबाईल के क्रॉस कनेक्शन का मामला है.जिसके लिए फोन किया था,पता नहीं उस पर क्या बीती होगी.

साल में एक-दो बार मुंबई आने-जाने के क्रम में मराठी की दो-चार बातें भी समझ में आने लगी हैं.मुंबई फोन लगाओ तो व्यस्त टोन के साथ मराठी में रिकार्डेड पंक्तियाँ चलने लगती हैं.थक हारकर एक दिन उन पंक्तियों का मतलब भी कस्टमर केयर से पूछ लिया था.

लेकिन यहाँ तो मोबाईल के क्रॉस कनेक्सन का मामला था.हममें से अधिकतर को मोबाईल के क्रॉस कनेक्शन का सामना करना पड़ता है.न चाहते हुए भी दूसरों की बातें सुननी पड़ जाती हैं.जेहन में कल्पित व्यक्ति का अक्स उभरने लगता है.कल्पना के घोड़े तो यूँ ही बेलगाम दौड़ते रहते हैं.उस पर रोक कहाँ संभव है?

कुछ साल पहले जब मोबाईल का नया नया कनेक्शन लिया था तब भी क्रॉस 
कनेक्शन आते थे.एक बार किसी ने फोन कर रहा कि लालू जी से बात करवाइए न! शायद पूर्व मुख्यमंत्री लालू जी के पी.ए. का क्रॉस कनेक्सन लग गया था.कई दिनों तक सोचता रहा कि आखिर हममें समानता क्या है?.मेरा उनकी पार्टी से दूर दूर तक नाता नहीं रहा है.

कुछ साल पहले खबर आई थी कि कर्नाटक के रायचूर जिले के वीरेश का फोन क्रॉस कनेक्शन के चक्कर में तत्कालीन पाकिस्तानी विदेश मंत्री हिना रब्बानी खारसे जा लगा था.अब वीरेश ने मोहतरमा से क्या बातें की होंगी.दो-चार इश्को-मोहब्बत की बातें तो आजकल इन मौकों पर हो ही जाती हैं. बन्दे ने यह तो न पूछा होगा कि आप कौन सी कंपनी का बैग इस्तेमाल करती हैं,या कितने हजार डॉलर में टोरंटो या मनीला से खरीदीं.यह भी न पूछा होगा कि आप कौन सा परफ्यूम इस्तेमाल करती हैं.

जाहिर है ऐसे मौकों का इस्तेमाल करना यहाँ के युवक बखूबी जानते हैं.शान में वो सब कशीदे पढ़ने लगते हैं कि शीरी-फरहाद भी बगलें झाँकने लगें. नाहक ही आईबी और आई.एस.आई वाले पीछे पड़ गए.


वैसे हिना रब्बानी जब भारत आईं थीं तब मीडिया वाले भी इसी तरह पीछे पड़े थे.उनके चेहरे और बैग पर ही ज्यादा फोकस रहता था.टी.वी. एंकर घंटों इस बात को दिखाते रहे थे कि उनका बैग किस कंपनी का है, कौन सा परफ्यूम इस्तेमाल करती हैं,वगैरावगैरा.

क्रॉस कनेक्शन आजकल आम बात हो गई है.इसकी वजह से ही कई जोड़ियाँ बन गईं.कई लोगों की जिंदगियां बदल गई हैं,कईयों को तो लाईफ पार्टनर तक मिल गए हैं.एक बार क्रॉस कनेक्शन होते ही सीधे कनेक्शन का सिलसिला चल पड़ता है.साथ-साथ जीने मरने की कसमें खाई जाने लगती हैं,बंदा एक नए ताजमहल के सृजन का सपना देखने लगता है और मुग़ल बादशाह को कोसने से बाज नहीं आता………

किसी शहंशाह ने बनाकर खूबसूरत ताजमहल
हम ग़रीबों के मुहब्बत का मजाक उड़ाया है


लेकिन यह नामुराद क्रॉस कनेक्शन भी तो सबके भाग्य में नहीं लिखा होता.हमें तो ईर्ष्या हो रही है वीरेश से.काश ! अपना ही क्रॉस कनेक्शन लग जाता हिना रब्बानी जी से तो दिल का हाल खोल कर रख पाते या नहीं,नहीं मालूम. अक्सर ऐसे मौकों पर अपनी आवाज दगा दे जाती है और मन की बात मन में ही रह जाती है.

अब तो यही ख़यालात दिल को बेचैन कर देता है कि………

अपने मन को जाहिर करने का
दुनियां में बहुत बहाना
किन्तु किसी में माहिर होना
हाय! न मैंने अब तक जाना
जब-जब मेरे उर में सुर में
द्वन्द हुआ है,मैंने देखा
उर विजयी होता,
सुर के सिर हार मढ़ी ही रह जाती है’.

(हरिवंश राय बच्चन की कविता से साभार)

Keywords खोजशब्द :- Mobile,Cross-Connection,Humor