Thursday, September 17, 2015

सूर्यपुत्र और ग्रीक कथाएं

ग्रीक कथाओं में फेथन
कई भारतीय पौराणिक कथाओं एवं ग्रीक कथाओं में काफी समानता है,लेकिन यह समानता कथाओं के प्रारंभ में ही है,इनका अंत बिल्कुल भिन्न है.

सूर्यपुत्र कर्ण महाभारत के प्रमुख पात्रों में से एक है.उसके बिना महाभारत की कथा पूरी नहीं होती.सूर्य जैसे तेजस्वी पिता के पुत्र होते हुए भी उसे आजीवन नाजायज संतान होने का अभिशाप भोगना पड़ा.कर्ण के समान ग्रीक कथाओं में सूर्य का पुत्र फेथन है.उसे मां का प्यार तो मिलता है और पिता का सानिंध्य भी, लेकिन उसका अंत अत्यंत दुखद होता है. ग्रीक पौराणिक कथाओं में सूर्य देवता का नाम हीलियस है.उसका जगमगाता हुआ भव्य महल सुदूर पूर्व में कोचलिस के पास स्थित है.

भोर होते ही उसका प्रिय पक्षी मुर्गा जोर से बांग देकर अपने स्वामी के आगमन की सूचना देने लगता है.उसकी बहन उषा की देवी सुंदरी इऑस अपनी गुलाबी अँगुलियों से पूर्व के विशाल द्वार खोल देती है और अपने चार घोड़ों के रथ पर आसीन हीलियस दिवस-यात्रा पर निकल पड़ता है.हीलियस का व्यक्तित्व प्रभावपूर्ण है.कहीं-कहीं उसके शरीर में पंख भी दर्शाये गए हैं जो उसकी तीव्र गति के प्रतीक हैं.उसकी पत्नी का नाम पर्सी है.

हीलियस की एक प्रेमिका है क्लामिनी.वह उसके संसर्ग से एक पुत्र को जन्म देती है जिसका नाम है फेथन.क्लामिनी अपने पुत्र फेथान को पालती-पोसती और बड़ा करती है.जब फेथन कुछ बड़ा होता है तो क्लामिनी उसे प्रतिदिन उगते सूरज की ओर संकेत करके उसके दिव्य पिता के अद्भुत सौंदर्य और तेज के बारे में बताया करती है.

फेथन सूर्य देवता के पुत्र होने के बारे में जानकर गर्व से भर उठता है और अक्सर अपने दोस्तों को बताया करता है.दोस्त उससे इस बात का प्रमाण देने को कहते हैं.वह तत्काल अपनी मां के पास पहुँचता है और सूर्य देवता के पुत्र होने का प्रमाण मांगता है.क्लामिनी आकाश में यात्रा कर रहे सूर्य की और हाथ उठाकर कहती है कि ‘स्वयं सूर्य देवता साक्षी हैं कि मैंने तुसे असत्य नहीं कहा. आकाश में चमकता सूर्य और पृथ्वी पर फैला उसका प्रकाश जितना सत्य है,उतना ही सत्य यह है कि तुम सूर्य देव के पुत्र हो.यदि तुम इस बात से संतुष्ट नहीं तो स्वयं अपने पिता सूर्य देव से पूछ लो.’

सोच-विचार कर वह सूर्य के महल की और चल पड़ा.अद्भुत था सूर्य का महल.स्वर्ण की दीवारें,हाथी दांत की तरह,उनमें जड़ित हीरे-जवाहरात.ऐसा लगता मानो महल प्रकाश के टुकड़ों से बना हो.वहां हर समय दिन का उजाला फैला रहता.रात और अंधेरे का कहीं नाम न था.स्वर्ण के सिंहासन पर सूर्य देवता हीलियस विराजमान थे.

हीलियस ने फेथन को देखते ही पहचान लिया कि वह उसका पुत्र है.सूर्य ने अपने सिर से किरणों का ताज उतारकर एक ओर रखते हुए उसके आने का कारण पूछा.सूर्य के मुस्कुराते चेहरे को देखकर आश्वस्त हुए फेथन से आने का कारण पूछा.उसके आने का प्रयोजन जानते हुए सूर्य देव ने कहा कि क्लामिनी ने उसे सत्य बताया है.आज जो चाहो मांग लो.

फेथन ने न जाने कितनी बार सूर्य के रथ को आकाश में यात्रा करते देखा था.वह एकदम से बोल उठा,बस एक दिन के लिए मुझे अपना रथ दे दें.हीलियस का को पल भर में ही एहसास हो गया कि वचन देकर उन्होंने कितनी गलती की है.अपने सुनहले बालों वाले सिर को इनकार में हिलाते हुए उन्होंने कुछ और मांगने को कहा लेकिन फेथन अपने हठ पर कायम था.यौवन की उदंडता उसकी रगों में दौड़ रही थी.एक-एक कर तारे बुझ चले थे.उषा ने भी द्वार खोल दिए थे और गुलाब के फूलों से भरा मार्ग उसके आंचल सा महक उठा था.

हताश हो हीलियस फेथान को रथ के पास ले गया.उसके सिंहासन पर हीरे जड़े थे जो सूर्य के प्रकाश में और भी चमक उठते.एम्ब्रोशिया का भोजन लिए हुए स्वस्थ,सुदृढ़ घोड़े रथ में जुटे थे.हीलियस ने एक द्रव फेथान के मुख पर मल दिया ताकि वह झुलसा देने वाली लपटों की गर्मी सह सके.गर्व से भरा हुआ फेथन तुरंत रथ पर चढ़ गया.हीलियस ने लगाम उसके हाथ में थमा दी.

गर्वोन्मत्त फेथन का रथ पूर्व के द्वार से निकला.घोड़े इतने तेज दौड़ने लगे कि हवाएं भी पीछे छूटने लगीं.सामने आकाश का विस्तृत क्षेत्र था और नीचे पृथ्वी.पल भर में ही उसका सीना गर्व से भर उठा.लेकिन शीघ्र ही स्थिति बदल गयी.रथ तेजी से इधर-उधर झटका खाने लगा.फेथन घोड़ों पर से नियंत्रण खो बैठा.घोड़े समझ गए थे कि उसका लगाम कमजोर हाथों में है.वे अपनी इच्छानुसार इधर-उधर दौड़ने लगे.

फेथन भय से मूर्छित हो गया और लगाम उसके हाथ से छूट गयी.घोड़े सरपट दौड़े जा रहे थे,फेथन के प्राण गले में अटके हुए थे.बादलों से धुंआ उठने लगा था.रथ अपना निश्चित मार्ग छोड़कर काफी नीचे आ गया.सूर्य की गर्मी से पहाड़ों में आग लग गयी.सबसे पहले इसका शिकार हुआ सबसे ऊँचा पर्वत इडा,जो अपने झरनों के लिए प्रसिद्ध था,म्यूजेज का निवास स्थान हेलिकन और परनासस.
सूर्य रथ निरंतर एक पुच्छल तारे की तरह पृथ्वी की ओर गिरता चला आ रहा था.बड़े-बड़े नगर,उंची विशाल इमरतें जलकर खंडहरों में बदल गयीं.फसलें जलकर राख हो गयीं.जंगलों में आग लग गयी और उबकी लपटें आकाश तक पहुँचने लगीं.हरे-भरे घास के मैदान राख और रेत के ढेर बन गये.लिबयान का सुंदर प्रदेश रेगिस्तान बन गया.

कहते हैं इसी कारण विश्व के एक भाग के लोग बिलकुल काले पड़ गए,जिन्हें नीग्रो कहा जाता है.धरती में दरारें पड़ गयीं.झरनों का पानी खौलने लगा.नदियां सूख गयीं.समुद्र के देवता पसायदान ने तीन बार जल की सतह से अपना सर उठाकर देखने की कोशिश की,लेकिन सूर्य के तेज को सहने में असमर्थ हो गया.यह अग्नि प्रलय था.दग्ध होकर पृथ्वी ने रक्षा के लिए ज्यूस को पुकारा.

देव सम्राट ज्यूस ओलिम्पिस स्थित अपने महल में सो रहा था.पृथ्वी की चीत्कार से उसकी नींद खुली तो नीचे देख कर अचंभित रह गया.सभी देवता तत्काल एकत्रित हुए.पृथ्वी की रक्षा के लिए न तो पानी का सोता बचा था और न कोई बादल का टुकड़ा.

पृथ्वी को बचाने का जब कोई उपाय नहीं बचा तो ज्यूस ने अपना वज्र उठाया और फेथान को लक्ष्य कर फेक दिया.वज्र प्रहार से पल भर में सूर्य का रथ और फेथन का शरीर क्षत-विक्षत हो एरिडोनस नदी में जा गिरा. फेथन की बहनें करुण विलाप करने लगी.कई दिनों तक वे उसी नदी के किनारे बाल बिखेरे रोती रहीं.

अंतत देवताओं को उन पर दया आ गयी और उन्हें वृक्षों में परिवर्तित कर दिया.फेथन के मित्र सिगनस ने नदी में डुबकियां लगाकर फेथन के शरीर के कुछ अंग निकाले और विधिपूर्वक उसका अंतिम संस्कार किया.लेकिन उसके बाद भी वह शेष अंगों की खोज में पागलों की तरह नदी में तैरता और डुबकियां लगता रहता था,अतः देवताओं ने उसे हंस बना दिया.हंस बना सिगनस आज तक हीलियास के दुस्साहसी पुत्र फेथन के अंगों को ढूंढ़ रहा है.

17 comments:

  1. Thank for sharing the stories.
    Here's a comparison between some of the Greek Gods/heroes and Indian gods/heroes: http://zigverve.com/lifestyle/living-spirituality/10-fascinating-parallels-between-greek-and-indian-mythology/

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  2. ग्रीक देवताओं की किदवन्तियाँ रोचक होती है. सुन्दर प्रस्तुति.

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  3. सुन्दर प्रस्तुति.....

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  4. सृष्टि के विभिन्न क्रिया-व्यापारों को कल्पना और मानवी संबंंधों के रूपकों के माध्यम से वर्णित करने की प्रवृत्ति भारतीय और ग्रीक दोनों की पुराकथाओं में विद्यमान है -आदिम प्रवृत्तियों की झलक भी दोनों मे मिलती है.

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  5. बहुत ही सुंदर प्रस्‍तुति।

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  6. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (18.09.2015) को "सत्य वचन के प्रभाव "(चर्चा अंक-2102) पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ, सादर...!

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  7. बहुत सुंदर प्रस्तुति ।

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  8. बहुत अच्छी ज्ञानवर्धक प्रस्तुति
    आपको मंगलमूर्ति भगवान गणेशोत्सव की हार्दिक शुभकामनायें

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  9. Very interesting information,thanks.

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  10. ग्रीक कथाएँ हमेशा से ही रोचक और मिथकीय रही हैं. सुन्दर लेखन. सादर ...

    नई कड़ियाँ :- किसने दिया था जय हिन्द का नारा ?

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  11. सुन्दर प्रस्तुति कथा सुनने में अच्छा लगता है

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  12. waah...very interesting..humari dadi nani ki kahaniyon se zyada action hai greek stories me. worth reading.

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  13. इस रोचक ग्रीक कथा में कितना रोमांच है ... रूरी कोलेकर अपने ग्रन्थ भी कितना कुछ कहते हैं ... आभार इस कथा के लिए ...

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  14. अत्यंत रोचक. ग्रीक साहित्य से परिचित कराने के लिए.

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  15. ग्रीक कथा पर अच्छा लेख .....
    http://savanxxx.blogspot.in

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