Thursday, July 10, 2014

नयनों की भाषा


आँखों को लेकर बेहद संजीदा और उम्दा शायरी की गई है.तमाम नए और पुराने शायरों ने आँखों की भाषा पढ़ने की कोशिश की है और तरह तरह की उपमाएं दी हैं.

जर्मन लेखक और कवि राइनर मारिया रिल्के की एक कविता हैजिसका अनुवाद रामधारी सिंह 'दिनकर' ने किया था.कविता कुछ इस प्रकार है - 'काढ़ लो दोनों नयन मेरेतुम्हारी ओर अपलक देखना तब भी न छोडूंगा'. यहाँ प्रेम अपनी पराकाष्ठा की हद को छू लेता है.आँख न होने के बावजूद भी लगातार देखे जाने की बात वही इंसान कर सकता है,जिसकी अंतर्दृष्टि खुल चुकी हो.जो मात्र बाहरी आँखों के भरोसे जिंदा न हो.सच तो यह है कि प्रेम ही एकमात्र आँख है इस दुनियां में.

एक स्पेनिश कहावत के अनुसार -नीली आँखें कहती हैं - मुझे प्यार करो,नहीं तो मर जाउंगी.काली आँखें कहती हैं - मुझे प्यार करो नहीं तो मार दूँगी.तमाम भाषाओँ में आँखों की खूबसूरती को बयान करने की कोशिश की गई है.लेकिन कहते हैं न कि जो बात कह दी जाय या बयान हो सके वो झूठी हो जाती है क्योंकि सच हमेशा अनकहा,अनगढ़ और कुदरती रूप में होता है.साहित्य में आँखों को लेकर काफी कुछ लिखा गया है.

बात अगर ग़ालिब की हो तो बात ही कुछ और होती है.ग़ालिब की शायरी में अनायास ही फलसफा का पुट दिखाई देता है,जब वे कहते हैं -

'रगों में दौड़ते रहने के हम नहीं कायल,जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है'.

यहाँ आँख से लहू का टपकना इस बात का सबूत है कि ग़ालिब के दामन - ओ - दर्द किस कदर गीले  थे.किस कदर तकलीफ के तकिये पर सर रख कर उम्र भर सोते रहे ग़ालिब और सोच किस आंच पर पकती रही. ग़ालिब का ही एक और शेर है -

'आँख की तस्वीर सरनामे पे खींची है कि ता,
तुझ पे खुल जाए की उसको हसरत - ए - दीदार  है

इस शेर में कहा गया है कि लिफाफे पर आँख की तस्वीर बनाई है ताकि यह पता चले कि  तुम्हें देखना चाहते  हैं .

अपनी शायरी में सियासत की स्याही सहित मुहब्बत की सादगी समोने वाले अहमद 'फराज' कहते हैं..

'सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं,
सो उनके शहर में कुछ दिन ठहर के देखते हैं'

महबूब को देखने की आरजू में फराज उसके शहर में कुछ दिन ठहरना चाहते हैं.बहुत ही साधारण ढंग से कही गई बात अपने आप में गहरा रहस्य छुपाए हुए है.

फराज का ही एक शेर है –

तू भी दिल को इक लहू की बूँद समझा है 'फराज'
आँख गर होती तो कतरे में समंदर देखता

कतरे में समंदर देखने के लिए जिस मासूम आँख की जरूरत है वो सबके पास नहीं होती.दरअसल किसी भी चीज को कई नजरिये से देखा जा सकता है.जिस तरह बीज में दरख़्त की संभावना छुपी होती है और उसी बीज में फल, फूल,खुशबू आदि सब कुछ मौजूद होता है.उसी तरह कतरे में समंदर देखने के लिए आध्यात्मिक दृष्टि की आवश्यकता है .

उदास आँखों को पढ़ते हुए एक शायर कहते हैं...

मगर अश्क की खुशबू पहचानता हूँ मैं
खुद से कहीं जियादा तुझको जानता हूँ मैं
कुछ और नहीं तो बस इक बात का हक़ है
उदास आँखों में पानी अजीब लगता है

46 comments:

  1. कल 11/जुलाई /2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

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    1. सादर धन्यवाद ! राकेश जी. आभार.

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    1. सादर धन्यवाद ! आशीष भाई. आभार.

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  4. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (11.07.2014) को "कन्या-भ्रूण हत्या " (चर्चा अंक-1671)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, वहाँ पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

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  5. आँखें ... और उनकी भाषा ...
    रोचक आलेख ...

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  6. आपकी इस रचना का लिंक कल दिनांक - ११ . ७ . २०१४ को I.A.S.I.H पोस्ट्स न्यूज़ पर होगा , कृपया पधारें धन्यवाद !

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    1. सादर धन्यवाद ! आशीष भाई. आभार.

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  7. रोचक आलेख .....

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  8. बढ़िया प्रस्तुति-
    आभार आपका-

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    1. सादर धन्यवाद ! आ. रविकर जी. आभार.

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  9. आँखों के नज़ारे बड़े प्यारे !
    रोचक !

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  10. क्या बात है.....बढ़िया प्रस्तुति! धन्यवाद.

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  11. बहुत सुन्दर आलेख...

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  12. बहुत बढ़िया

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    1. सादर धन्यवाद ! अनुषा जी. आभार.

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  13. 'काढ़ लो दोनों नयन मेरे, तुम्हारी ओर अपलक देखना तब भी न छोडूंगा'. यहाँ प्रेम अपनी पराकाष्ठा की हद को छू लेता है.आँख न होने के बावजूद भी लगातार देखे जाने की बात वही इंसान कर सकता है,जिसकी अंतर्दृष्टि खुल चुकी हो.जो मात्र बाहरी आँखों के भरोसे जिंदा न हो.सच तो यह है कि प्रेम ही एकमात्र आँख है इस दुनियां में.

    बहुत सुन्दर

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    1. सादर धन्यवाद ! स्मिता जी. आभार.

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  14. Replies
    1. सादर धन्यवाद ! अभिषेक जी. आभार.

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  15. कतरे में समंदर देखने के लिए आध्यात्मिक दृष्टि की आवश्यकता है . सुंदर आलेख !

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    1. सादर धन्यवाद ! प्रीति जी. आभार.

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  16. प्रिय राजीव जी जय श्री राधे ..सुन्दर रचना ...आँखें मन के अंदर भी झाँक लेती हैं ..दर्पण हैं .मन की बताती हैं अच्छी व्याख्या .सुन्दर आलेख और रचना
    आभार
    भ्रमर ५

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    1. सादर धन्यवाद ! आ. भ्रमर जी. आभार.
      जय श्री राधे.

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    1. सादर धन्यवाद ! अमित जी. आभार.

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  18. समझ सको तो बहुत कुछ कहती हैं आँखें...खूबसूरत आलेख. बीच बीच में दिए अशआर बेहद पसंद आये...आभार!

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  19. This comment has been removed by the author.

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  20. नयनों की भाषा को सुन्दरता से अभिव्यक्त किया है ....!

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  21. क स्पेनिश कहावत के अनुसार -नीली आँखें कहती हैं - मुझे प्यार करो,नहीं तो मर जाउंगी.काली आँखें कहती हैं - मुझे प्यार करो नहीं तो मार दूँगी.तमाम भाषाओँ में आँखों की खूबसूरती को बयान करने की कोशिश की गई है.लेकिन कहते हैं न कि जो बात कह दी जाय या बयान हो सके वो झूठी हो जाती है क्योंकि सच हमेशा अनकहा,अनगढ़ और कुदरती रूप में होता है.साहित्य में आँख को लेकर काफी कुछ लिखा गया है.क्या गज़ब का लेख लिखा है श्री राजीव जी आपने , आँखों को इतना गहराई से पढ़ा आपने भी और मैंने भी

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